स्वयं से प्रेम :

प्रेम एक
घटना है जो हर व्यक्ति के जीवन में कभी भी, कही भी घट सकती है । प्रेम कभी किया
नहीं जाता है बल्कि हो जाता है । प्रेम में जिया जाता है, अनुभूत किया जाता है
लेकिन प्रेम के बारे में कहना बहुत मुश्किल है और अगर कहने का प्रयास किया कि वह
क्षुद्र हो जाता है ।
अगर आप किसी
एक व्यक्ति से बेशर्त प्रेम करते है तो वह परमात्मा के मंदिर में पहला कदम होगा और
जब अनेक व्यक्तियों को बेशर्त प्रेम कर पाते है तो आप मंदिर में प्रवेश कर जाते है
और जब पुरे ब्रह्माण्ड में ये प्रेम फ़ैल जाता है तो आप स्वयं ही परमात्मा हो जाते
है उसी मंदिर के ।"~~महाशुन्य
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