Sunday, 16 July 2017

पाना और खोना : Gain and Loss :

पाना और खोना :

"जो दिया जा सकता है,वहीं छीना भी जा सकता है,
जिसे दिया ना जा सके,उसे छीना भी नहीं जा सकता है,
जो छीना नहीं जा सकता है,उसे पाया भी नही जा सकता है,
जिसे पाया जा सके,उसे खोया भी जा सकता है,
जो केवल पहले से ही पाया हुआ है,केवल वही पाया जाता है,
जो केवल पहले से ही छीना हुआ है,केवल वही छीना जा सकता है।"~~महाशून्य

Gain and Loss :

"That can be given,it can be taken way,
That can not be given,it can not be taken away,
Which can not be taken away,it also can not be found,
That can be found,it may also be lost,
Which is already found,only that is found,
Which is already captured,can only be taken away."~~Mahashunya

आत्मा का स्वभाव : The Nature of Spirit :

"आत्मा का स्वभाव :

आत्मा अगर ज्ञानस्वरूप है तो उसमे अज्ञान में उतरने की भी संभावना निहित है,
आत्मा अगर शांतस्वरूप है तो उसके अशांति में होने की भी संभावना छिपी है,
आत्मा अगर सत्य स्वरूप है तो उसके असत्य में होने की भी संभावना छिपी है,
यानी जिसमे जो क्षमता है उसमे ही उसके विपरीत क्षमता विद्यमान है।"

~~महाशून्य

The Nature of Spirit :

"If the nature of spirit is knowledge then there is possibility to be in ignorance,
If the nature of spirit is peaceful then there is possibility to be in turmoil,
If the nature of spirit is real then there is possibility to be in unreal,
means there is possibility of having opposite of the potential ability also."~~Mahashunya

भीतर की रोशनी :


भीतर की रोशनी :

"अगर सभी अपने अपने भीतर विवेक रूपी रोशनी को जगा ले तो पुरे विश्व में रोशनी हो सकती है।
अगर दुसरो को रोशन करने चले तो खुद भी रोशन नहीं हो पाओगे और ना ही दूसरों को रोशन कर पाओगे।

जिसने अपने स्वयं के भीतर को प्रकाशित कर लिया है तो वो दूसरों को प्रकाशित होने में केवल सहायक हो सकता है कुछ क्षणों के लिए लेकिन आपको अपनी ही बाती और तेल चाहिये और लौ भी आपको ही जलानी है। 
अगर आप भीतर से पात्र हो गए जलने के तो गुरु की रोशनी आपके भीतर भी प्रकाशित हो जायेगी।फिर आपकी और गुरु की रोशनी एक ही होगी।"~~महाशून्य

ज्ञान और ध्यान :

ज्ञान और ध्यान :

"तथागतित धार्मिक गुरुओं का काम है आपके भीतर कचरा डालना और सद्गुरुओं का काम आपके भीतर के कचरे को साफ करना।
कचरा डालना 'ज्ञान' है और कचरा साफ करना 'ध्यान' है।

जो भी तथागतित ज्ञान तुमने अभी तक अर्जित किया है,स्कूलों में,विश्वविद्यालयों में ,गुरुकुलों में जो तुम्हें शिक्षकों से ,अध्यापको से,शास्त्रों से ,धार्मिक पंडितों से,पुरोहितों से,मुल्ला मौलवीयों से,पादरियों से पोप से उससे तुम्हारा मन जानकारियों से भर जाता है । मन का जानकारियों से भर जाना ज्ञान है।

लेकिन अगर तुम्हे परमात्मा का साक्षात्कार करना है तो इन सभी ज्ञान से तुम्हें मुक्त होना होगा और मन को बिलकुल खाली करना होगा,मन को शून्य करना होगा। मन को शून्य करना ही ध्यान है।
सद्गुरु का यही काम है की वो आपको इन सब से मुक्त होने की ध्यान की कला बता दे और आप जीते जी उस शून्य की अनुभूति कर ले।"~~महाशून्य

जानना : Knowing :


जानना :
"ना तो में कुछ जानता हूँ, ना कुछ जानने की इच्छा है, ना कुछ जानना शेष है, ना जानने वाला,ना जिसे जाना जाता है वह शेष है।" ~~महाशून्य

Knowing :
"Neither I know anything, Nor have any desire to know, Neither something left to know, Nor the know-er and to whom to know is left."~~Mahashunya

समय का बोध : Conscious of the Time :

समय का बोध :

"मन की अशांति में समय का बोध है,
परंतु मन की शांति में समय का पता नहीं चलता है।“
~~ महाशून्य

Conscious of the Time :

"Disturbance of the mind is conscious of the time, but the time is not observed while peace of mind."
~~ Mahashunya

सत्य क्या है ? : What is Truth ?

सत्य क्या है ?

"सत्य ,परमात्मा तो अनुभूति का विषय है,कहने का नही,सत्य में तो हुआ जाता है,जिया जाता है,जाना जाता है,जितना भी अभी तक कहा गया है वो भी पूर्ण सत्य नहीं हो सकता है,क्योंकि जो शब्दों के परे है उसको शब्दों में केसे बयाँ कर सकते है ।"~~महाशून्य

What is Truth ?

"Truth,Divine is the subject of experience,not words ,truth can be experienced ,live and known.Whatever had been told so far about the truth cannot be perfectly true,because how words can explained which is beyond words."~~Mahashunya