Sunday, 16 July 2017

बुद्ध पूर्णिमा : Buddha Purnima :

बुद्ध पूर्णिमा :

"बुद्ध वह है जो अपने स्वयं के वास्तविक घर वापस आ गया है,और बाकी सभी जिनकी अपने स्वयं के वास्तविक घर वापस आने की आगामी भविष्य मे पूर्ण संभावना है वो भविष्य के बुद्ध है।"~~#महाशून्य
बुद्ध पूर्णिमा की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाये।

Buddha Purnima :

"Buddha is one who has returned back to his real home, and all others who have their potential of returning back to their real home in near future are future Buddhas."~~ #Mahashunya
Happy Buddha Purnima to all my dear friends.

अपने जीवन में पूरा खिलो :


अपने जीवन में पूरा खिलो :

"कमल की तरह खिल जाओ। और
कमल की ही तरह निर्लेप रहो संसार में। 

संसार में रहकर भी संसार तुम्हे आसक्त ना कर पाये। जैसे कमल कीचड़ में रहकर ही खिलता है और फिर भी कीचड़ उसे छु नहीं पाता है । ऐसा व्यक्ति ही वास्तव में जीता है,उसे ही जीवन जीने की कला आती है। बाकि सब तो बोझा लेकर जिंदगी काट रहे है।"~~महाशून्य

गुरु तो रंगरेज :

गुरु तो रंगरेज :

कबीर ने कहा है " गुरु तो रंगरेज है "
वो शिष्य को अपने ही रंग से रंग देता है मतलब वो शिष्य को भी गुरु ही बना देता है, कबीर फिर कहते है :
*"पारस और संत मे एक ही अन्तर जान,*
*पारस लोहे को सोना करे,संत कर दे आप समान॥“*

मीरा कहती है :
*"श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया । ऐसी रंग दे, के रंग नहीं छुटे , धोभिया धोये चाहे सारी उमरिया, लाल ना रंगाऊं मैं, हरी ना रंगाऊ, अपने ही रंग में रंग दे चुनरिया, श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया, श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया । बिना रंगाये मैं तो घर नाही जाउंगी, बीत ही जाए चाहे सारी उमरिया॥ “*
"बैठी संतो के संग, रंगी मोहन के रंग, मीरा प्रेमी-प्रीतम को मनाने लगी"
इस शुभ अवसर पर मिटा तो अपने भीतर का द्वेष,वैमनस्य और
सभी प्रेमियों से और शत्रुओं से गले मिलकर प्रकृति के सप्त रंगो से खुद भी रंग जाओ और औरों को भी रंग दो।
अपने जीवन को भी प्रतिदिन खुशियों के रंगो से भर लो।

असली ख़ुशी :

असली ख़ुशी :

"असली ख़ुशी आपके भीतर है,यह बाहर की परिस्थिति पर निर्भर नहीं है।
क्या आप बिना मोबाइल फ़ोन, लैपटॉप, टीवी, कार, सूंदर वस्त्र आभूषण, स्वादिष्ट भोजन के भी खुश रह सकते है।
अगर आपका जबाब 'हां' है तो फिर आप गरीब होकर भी बादशाह है।
और अगर आपका जबाब 'नहीं' है तो आप अमीर होकर भी गरीब ही है।"~~महाशून्य

शिव,शक्ति और माया :

शिव,शक्ति और माया :


"शिव है निराकार परमात्मा,


शक्ति है साकार प्रकृति और 


माया है परिवर्तनशील प्रकृति।"~~ महाशून्य 

वास्तविक प्रेम दिवस (वैलेंटाइन डे ) :

वास्तविक प्रेम दिवस (वैलेंटाइन डे ) :

"प्रेम करने का कोई दिन नहीं होता है। प्रेम तो प्रतिक्षण होता है।
प्रेम किसी व्यक्ति विशेष या वस्तु विशेष को ही नहीं किया जाता है। 
प्रेम तो एक स्थिति है जिसमे सदा सभी के प्रति प्रेम बहता रहता है,जैसे फूल अपनी खुशबू बिखेरता है चाहे कोई हो न हो।
अगर प्रेम किसी शर्त पर निर्भर है तो वो प्रेम नहीं है,सौदा है।
प्रेम तो बेशर्त होता है।
सभी को समानरूप से प्रतिपल प्रेम का होना ही वास्तविक प्रेमदिवस मनाना है।"
~~महाशून्य

भागना और जागना :

भागना और जागना :

"संसार से भागना नहीं है,
केवल जागना है 
और कभी भी कहीं भी जागा जा सकता है,
इसके लिए जंगल में या हिमालय में या किसी आश्रम में जाने की आवशयकता नहीं है।
यहीं संसार में,
गृहस्थ में रहकर ही जागा जा सकता है।"~~ महाशून्य