Saturday, 24 June 2017


*सम्मान समारोह*

अग्रसेन युथ फेडरेशन,इंदौर
द्वारा "सद्गुरु महाशून्य (महेश अग्रवाल)"
को उनको अध्यात्म के प्रति अपना जीवन समर्पण और निःशुल्क आध्यात्मिक समाज सेवा कार्य के लिए समाज के राष्ट्रीय सम्मलेन में सम्मानित किया गया।








समारोह की कुछ झलकियाँ।

A speech was also given to the society on 19 th Nov as a guest invited by "Agrasen Youth Federation" in a national programme organized in Gandhi Hall,Indore.
"This speech had been telecasted on Sahara channel and other channel on 19 th Nov.





*वास्तविक विजयादशमी*


*वास्तविक विजयादशमी*

विजयादशमी का अर्थ है अपने भीतर की पाँचोंं इन्द्रियों पर और पाँचों विकारो पर विजय।
पांच इन्द्रिय है ,आँख,नाक, कान, जिव्हा और त्वचा। और
पांच  प्रमुख विकार है काम, क्रोध,लोभ,मोह और अहंकार
पाँचों इन्द्रियों का सम्यक उपयोग ही उन इन्द्रियों को जीतना है जैसे सम्यक दृष्टी,सम्यक श्रवण,सम्यक स्वाद,सम्यक स्पर्श।
यहाँ पर सम्यक का अर्थ है इन्द्रियों के प्रति अनासक्त भाव।
और पाँचों विकारो से मुक्ति का अर्थ है भीतर एक होश ,एक प्रज्ञा का जन्म जो किसी भी विकार को उठने नहीं देती है। विकार उठने के पहले ही होश उसे उठने नहीं देते है।
इन सब पर विजय प्राप्त होगी जब आपके भीतर आत्मज्ञान उतरता है और वो ज्ञान उतरेगा आपके राम के प्रति समर्पण से ।
जिसने भी इन रावण के 10 सिर रूपी इन दसो पर विजय प्राप्त कर ली उसी ने वास्तविक विजयादशमी मनाई।
और इन विकारो पर विजय जब प्राप्त होगी जब राम रूपी भगवत्ता का ज्ञान रूपी बाण आपकी अहंकार रूपी रावण की नाभि पर पड़ेगा। रावण को अपनी नाभि के भीतर अमरत्व का घमंड था और वो घमंड तो टूटता ही है चाहे वो रावण का ही क्यों न हो।
जब राम यानि परमात्मा या सद्गुरु का शब्द रूपी बाण अहंकारी के ह्रदय में प्रवेश करता है तो वो प्रेम के गोले के साथ सारा का सारा भ्रम दूर कर देता है।
*सद्गुरु ऐसा सुरमा करे शब्द की चोट।*
*मारे गोला प्रेम का हरे भ्रम को कोट।।*
इसी शुभकामना के साथ की आप भी जल्दी ही अपने भीतर के इन विकारो पर विजय प्राप्त करेगे ।
आप सभी प्रेमियों को विजयादशमी की बहोत बहोत शुभकामनाये।"-महाशून्य

Sunday, 30 October 2016

अपने भीतर की ज्योत जलाओ

अपने भीतर की ज्योत जलाओ :

प्रेमपूर्ण प्रणाम सभी प्रेमियों को,
आप सभी ने इन तीन दिनों में धनतेरस,चौदस और दीवाली की इतनी शुभकामनाये भेजीं है की संभाले संभल नहीं रही है,इसीलिए में आप सभी प्रेमियों की तरफ से सभी प्रेमियों को आपस में ढेर सारी शुभकामनाये देते हुए यह निवेदन करता हूँ की मृत्यु से पहले अपने भीतर की ज्योत जरूर जला लेना।
बाहर के दीपक और रोशनी तो बहुत जलाते है प्रतिवर्ष लेकिन किसी एक क्षण अपने भीतर की प्रज्ञा को जगा लेना तो फिर आपके जीवन में प्रतिदिन,प्रतिक्षण दीवाली रहेगी।

आप सदा ही शांति में ,आनंद में और खुश रहेगे और दूसरों को भी आनंदित होने में सहयोग करेगे।
खूब प्रेम,ख़ुशी,उत्साह से दीवाली उत्सव मनाओ ।
दिल से मिलों ।
पुराने गिले शिकवा दूर करते हुए गले मिलो ।
अपने अहम् को एक तरफ रखकर सभी से समान रूप से प्रेम करे।
दिल खोलकर दे और बदले में लेने की आशा न करे।"~महाशून्य

इन्हीं शुभकामनाओं के साथ आप सभी प्रेमियों को दीवाली की ढेरों बधाईया।

Thursday, 22 September 2016

"अपने जीवन में पूरा खिले"

अपने जीवन में पूरा खिले :


वो बीज ही क्या जो वृक्ष न हो पाये,
वो ऋतु ही क्या जो बसंत की बहार न ला पाये,
वो मनुष्य ही क्या जो परमात्मा न हो पाये,
वो स्त्री ही क्या जो संतान को जन्म न दे सके,
वो नर ही क्या जो नारायण न हो सके,
वो भक्त ही क्या जो भगवान न हो सके,
वो साधना ही क्या जो साध्य तक न ले जा सके,
वो शिष्य ही क्या जो गुरु न बन सके,
वो गुरु ही क्या जो सत्य का ज्ञान न दे सके,
वो नाम ही क्या जिसमे ॐ का गुंजन न हो,
वो दिल ही क्या जिसने कभी प्रेम न किया हो,
वो सिर ही क्या जो गुरु चरणों में न झुकता हो,
वो पैर ही क्या जो सत्संग में न ले जाते हो,
वो कान ही क्या जो सत्संग न सुनते हो,
वो आंख ही क्या जो आश्चर्य से न भरी हो,
वो हाथ ही क्या जो परोपकार में न लगे हो,
वो वाणी कि क्या जिससे अमृत न बरसता हो,
वो मन ही क्या जो कभी शांत न होता हो,
वो सुख ही क्या जो कभी खो जाता हो,
वो दुःख ही क्या जो प्रभु कि याद न दिलाता हो।

जब तक आपका व्यक्तित्व पूरा नहीं खिलता जहाँ तक सम्भावना है तब तक वो शांति, वो आनंद, वो माधुर्य नहीं मिलेगा जिसके की आप हकदार है ।~~महाशून्य

Tuesday, 13 September 2016

जीवन और मृत्यु : Life and Death

"जीवन और मृत्यु :

जीवन तो सदा से था ,अभी भी हैं और सदा ही रहने वाला है ,जीवन कभी समाप्त नहीं होता हैं ,केवल जिसे हम मौत कहते हैं वह एक पड़ाव है जहाँ आत्मा अपना शरीर मतलब वस्त्र बदलती है और फिर से जीवन की आगे की यात्रा चलती रहती है ।
जीवन शाश्वत होता है,इस दुनिया में कुछ भी नष्ट नहीं होता है ,एक बालू का कण भी नहीं,केवल रूप बदल सकता है।

इस शाश्वत जीवन की कद्र करो ।
शान से जीओ और दुसरो जीवों को भी जीने दो ।" - महाशून्य

Tuesday, 16 August 2016

वास्तविक स्वतंत्रता : The Real Freedom

वास्तविक स्वतंत्रता :
"
राजनेतिक आजादी और आर्थिक आजादी से भी महत्वपूर्ण है मनुष्य के भीतर की स्वतंत्रता !
  • मनुष्य की आत्मा का नैसर्गिक स्वभाव है स्वतंत्रता,परतंत्रता नहीं!
  • अगर स्वतंत्रता भी किसी परतंत्रता से आयी है तो वो भी परतंत्रता ही हैं और अगर परतंत्रता भी     स्वतंत्रता से आती है तो वहीँ असली स्वतंत्रता है !
  • परमात्मा ने भी हमें स्वतंत्रता दी है कि चाहे तो हम दुःखी रहे और चाहे तो हम उसी परिस्थिति में सुखी हो सकते है!
  • इसीलिए अपनी वास्तविक स्वतंत्रता को उपलब्ध होना ही हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है और हमें मृत्यु के पहले उसे पाकर ही रहना है !

तभी हम वास्तविक स्वतंत्रता दिवस मना सकते है !"~~महाशून्य

मित्रता : Friendship

“मित्रता :
मित्र होना कोई छोटी घटना नही है,अगर आप किसी के मित्र है इसका अर्थ है की आप हमेशा तेय्यार है अपने मित्र के दुःख और सुख दोनो मे भागीदार होने के और अगर दुनिया के सभी लोग भी आपके विरुद्ध हो जाए तो भी मित्र आपका साथ कभी नही छोड़ता है,वही है असली मित्रता ।
प्रकृति आपकी सबसे बड़ी मित्र है अगर इससे आप अपनी मित्रता निभाते है तो ये बदले मे आपसे हज़ार गुना मित्रता निभाती है इसीलिए 
@ प्रकृति को अपना परम मित्र बनाए ।


@ प्रकृति के साथ बहकर यानी तालमेल बैठाकर जैसे पेड़-पोध ो को 
ना कटे,नदियो को स्वच्छ रखे,पहाड़ो को ना काटे ,प्रकृति के साथ छेड़छाड़ ना करकर,आणविक शस्त्र ो का निर्माण रोककर और जो शस्त्र मौजूद है उनका उपयोग ना करे और उन्हे पूरी तरह नष्ट करे ।


@ व्यर्थ प्रकृति के संसाधानो को नष्ट ना करे और प्रकृति के नियमो का पालन करते हुए इस बहुमूल्य प्रकृति को जीने लायक बनी रहने दे ,खुद भी जीए और औरो को भी जीने दे ।


मित्रता दिवस पर आप सभी मित्रो को मेरी बहोत शुभकामनाए ।"~~महाशून्य


Friendship:
Be friends is not a small event, if you have friendship with someone it means you are always ready to participate in the Sorrow and Happiness moments of the friends and will never leave the friend even the whole world becomes against your friend,that is real friendship.
Nature is your greatest friend and if you play your friendship with nature it play thousand times in return.
@ Be Ultimate friend of the Nature.


@ Flow with the nature by not cutting Plants and Trees,Keep cleaned all Rivers,Not cutting Hills and Mountains,Do not do any act against nature,Stopping of production of Nuclear Weapons,No use and destruction of all available Nuclear weapons safely.


@ Do not destroy unn
ecessary the Natural Resources and make this earth worth living for all beings by following the universal law of existence,Live yourself and Let others Live.

Happy Friendship day to All my dear Friends."~~Mahashunya