Friday, 12 February 2016

"गायों द्वारा मनुष्यो को एक पत्र"-A Letter From Cows to Human Being


""गायों द्वारा मनुष्यो को एक पत्र"

    

   है प्यारे मनुष्यो,

    सादर प्रणाम,
     * एक तरफ तो कहते हो हमे 'माता' और दूसरी तरफ हमारा ही शोषण इस तरह करते हो ।
·      * हमे अपने घर पर या गौशाला मे बाँधकर रखते हो ,घास,चारा भी खिलाते हो तो सिर्फ़ हमारे दूध के लिए और जो गाय दूध नही देती है उसे बेच देते हो कसाई के यहाँ कटने के लिए ।
·       * हम गायो ने कब तुम्हे आमंत्रित किया की आओ मनुष्यो हमसे हमारे बछड़ो का दूध छीन कर अपने बच्चो को पिलाओ ।
·        * हमारे बछड़े जो हमारा दूध पीने से सांड हो सकते थे , वो भले ही ना हो मनुष्यो का पुत्र सांड हो जाना चाहिए ताकि वो बड़ा होकर नाबालिग और बालिग महिलाओ के साथ बलात्कार कर सके और जिंदगी भर सांड की बुध्धि और उर्जा लेकर सेक्स मे ही डूबा रहे , अगर दुनिया मे बलात्कार मे हम गायो के दूध का भी थोड़ा हाथ हो तो कोई बड़ी बात नही है ।
·       * हमारी चमड़ी का उपयोग और माँस ख़ाँ लेते हो ।
·        * हमारे गोबर-मूत्र तक को तुमने नही छोड़ा , उसका भी कही ना कही उपयोग कर लेते हो , और बदले मे तूम हमे क्या देते हो एक 'माता का पद' और गर्व से कहते हो गाय मे 33 करोड़ देवताओ का वास होता है। क्या अपने देवताओ को ही काटकर नहीं खां रहे हो।
·        * ट्रॅक्टर और मोटर की खोज के बाद भी 21 वी सदी मे हमारे सांड से खेत मे हल और गाड़ी चलवाते हो ।

       वाह रे मनुष्य तुम्हारा ये गोरख धंधा , ये धंधा कब बंद करोगे , वो दिन कब आयेगा 
      * जब हम गाये स्वतंत्र होकर इस धरती पर घूमेगी और सारी गौशालाओ को बंद करवा दोगो ।
·       *  हमे हमारे खाने मे चारा ही मिलेगा ।
·        * पुरे विश्व में प्लास्टिक का उपयोग बंद हो और हमे प्लास्टिक और अन्य अखाद्य पदार्थ खाने पर मजबूर नही होना पड़ेगा ।
·        * तुम्हारे घरो का सड़ा-गला , बासी खाना खाने को नही दोगे ।
·        * हमारा दूध प्रथम हमारे बछड़ो को ही मिलेगा और फिर अगर अतिरिक्त दूध हो तो उसका उपयोग तुम कर सकते हो ।
·        * हम जब दूध देना कम या बंद कर देंगे तब हमे कसाई के यहा नही बेचेगे कटने और मरने के लिए ।
·         * सरकारे कोई क़ानून बनाकर विश्व से सारे कसाइखाने और हमारे माँस का आयात-निर्यात बंद करवा दोगे ।
·         * हमारी स्वाभाविक मौत के बाद भले ही आप हमारी चमड़ी ,हड्डी का उपयोग कर लेना ।
·         * हमारे जीते जी भले ही आप हमारे गोबर-मूत्र का उपयोग कर लेवे उससे हमे कोई कष्ट नही होगा ।

       आप ही हमारे भगवान है क्योंकि कृष्ण , बुद्ध , महावीर जैसे लोग तो कभी कभी सदियो में अवतरण लेते है।
        कृपा दृष्टि बनाओ है मनुष्यो हम गायो के परिवारो ,वंशो पर ,

       है मनुष्यो आशा है तुम्हारे कानो मे जुवे रेंग़ेगी और हम शोषण से बच जाएँगी।

       धन्यवाद,
   
      तुम्हारे द्वारा शोषित गायो का समुदाय"

(     ~~( महाशून्य)

Thursday, 11 February 2016

महाशून्य का सत्संग “अहंकार की बलि ..” इंदौर के साप्ताहिक समाचार पत्र “ग्रीन लाइफ “-इंदौर (म.प) ( सप्ताह-०२ जनवरी से ०८ जनवरी '२०१६ ) में छपा था Talk of Mahashunya on " Ahankar Ki Bali " Published in Weekly Newspaper " Greenlife ,Indore (MP)-Week from 02 nd Jan to 08 th Jan'2016."

महाशून्य का सत्संग “अहंकार की बलि ..”


महाशून्य का सत्संग “मनुष्य जन्म में ही मुक्ति की संभावना क्यों है ? ...” इंदौर के साप्ताहिक समाचार पत्र “ग्रीन लाइफ “-इंदौर (म.प) ( सप्ताह-१२ दिसम्बर से १८ दिसम्बर’२०१५ ) में छपा था Talk of Mahashunya on " Manushya Janm Me Mukti Ki Sambhavna Kyon ? " published in weekly newspaper " Greenlife ,Indore (MP)-Week from 12 th Dec to 18 th Dec'2015"

महाशून्य का सत्संग “मनुष्य जन्म में ही मुक्ति की संभावना क्यों है ?"


Wednesday, 10 February 2016

“महाशून्य के सत्संग का कुछ अंश “ कर्मो से मुक्ति –केवल आत्मज्ञानी ही मुक्त होता है ” इंदौर के साप्ताहिक समाचार पत्र “ग्रीन लाइफ “- इंदौर (म.प) ( सप्ताह-१४ नवम्बर से २० नवम्बर ’२०१५ ) के अंक में छपा था ।“ “A part of Talk of Mahashunya on " Karmo Se Mukti-Keval Atmagyani Hi Mukt Hota Hai " published in weekly newspaper " Greenlife ,Indore (MP)-Week from 14 th November to 20 th November '2015."

“महाशून्य के सत्संग का कुछ अंश “ कर्मो से मुक्ति –केवल आत्मज्ञानी ही मुक्त होता है ” 

महाशून्य का सत्संग “प्रेम गली अति साकरी...” इंदौर के साप्ताहिक समाचार पत्र “ग्रीन लाइफ “-इंदौर (म.प) ( सप्ताह-३१ अक्टूबर से ६ नवम्बर’२०१५ ) में छपा था Talk of Mahashunya on " Prem Gali Ati Sakri " published in weekly newspaper " Greenlife ,Indore (MP)-Week from 31 st Oct to 6 th Nov'2015"

महाशून्य का सत्संग “प्रेम गली अति साकरी...”


Love is Celebration : प्रेम उत्सव है

प्रेम उत्सव है : 

श्रीकृष्ण का प्रेम बेशर्त है, वे सभी को संमान प्रेम करते हैं लेकिन प्रेम कि अनुभूति सभी के भीतर उनके अहंकार के हिसाब से अलग अलग होती है, जिसका अहंकार पूरा मिट जाता है उसके भीतर पूर्ण प्रेम प्रकट हो जाता है । कृष्ण का प्रेम उत्सव है, नाच है, बांसुरी कि मधुर धुन है, संगीत है, आनंद है, रासलीला है ।
यदि तुम प्रेम करते हो तो कभी भी दुखी नहीं होगें, जो लोग प्रेम करते है वे सदा आनंदित रहते है, प्रसन्न रहते है और उनके जीवन में मिठास होती है ।
पिया खोलो किवाड़
अपने भीतर कि सारी गठानों को खोल दो, लोगो को अपने भीतर आने दो, अहंकार रूपी दरवाजा खोल दो, प्रेम में जीना प्रारंभ करो और पूरी पृथ्वी को प्रेम से भर दो तभी तुम वास्तविक जीवन का आनंद ले पाओगे, तभी जीवन सार्थक होगा, आनंदित होगा, प्रफुल्लित होगा ।
मीरा ने कहा है :
प्रेम गीत है मधुर आत्मा से गाये जाओ

प्रेम है द्वार स्वर्ग का ,
प्रेम मौन का संगीत है ।~~महाशुन्य

Love Without Reason : अकारण प्रेम

अकारण प्रेम

प्रेम किसी कारण से नहीं होता है, प्रेम अकारण होता है क्योंकि अगर प्रेम किसी कारण से हुआ तो जब भी कारण हटा तो प्रेम भी तिरोहित हो जायेगा ।
एक बार गौतम बुद्ध के पास आकार एक व्यक्ति ने उनके मुहं पर थूक दिया । बुद्ध ने उसे कपड़ें से पोंछकर कहा –‘और कुछ कहना है ?’ उस व्यक्ति ने कहाँ –‘मैंने कुछ कहा नहीं है ,थूका है ।

बुद्ध ने कहा –तुम अभी क्रोध में हो और क्रोध प्रकट करने के लिए तुम्हारे पास शब्द नहीं है इसीलिए थूककर अपना रोष प्रकट कर रहे हो । 
वह व्यक्ति चला गया ,लेकिन अगले दिन आकार माफ़ी मांगने लगा । 
बुद्ध ने कहा –‘ तुम मुझ पर ना थूकते थे इस कारण थोड़ी न मैं तुमसे प्रेम करता हूँ, मेरा प्रेम तो सदा है, मैं प्रेम करने पर विवश हूँ सभी को अकारण । सदगुरुओ का प्रेम अकारण होता है ।

जहाँ प्रेम है वहां भय नहीं और जहाँ भय है वहा प्रेम नहीं । भय और प्रेम साथ साथ नहीं हो सकते है ।"~~महाशुन्य