Sunday, 15 April 2018

महाशून्य की एक दिवसीय ध्यान की कार्यशाला "धाकड़ फिटनेस सेंटर ,इंदौर में सफलतापूर्वक संपन्न । कार्यशाला की कुछ झलकियाँ ..........

महाशून्य की एक दिवसीय ध्यान की कार्यशाला "धाकड़ फिटनेस सेंटर ,इंदौर में सफलतापूर्वक संपन्न ।कार्यशाला की कुछ झलकियाँ ..........






Friday, 8 December 2017

Mahashunya Prem Yog Shivir ( 21 Days ) at Indore (M.P.)-India महाशून्य प्रेम योग शिविर ( २१ दिवसीय ) ,इंदौर (म.प्र.)-भारत में

जनजागरण अभियान के तहत एक 21 दिवसीय योग शिविर का महाआयोजन*

वार्ड न.12, के पार्षद संतोष सिंह गौर और महाराणाप्रताप योग परिवार महाराणाप्रताप सभाग्रह ,बाणगंगा,इंदौर में एक पावन समाजोत्थान व जन चेतना को नवगति,नव-लय, नव-ताल व नवाध्यत्मिक प्रेम योग सत्संग, नृत्य तथा हास्य को ,साधक के तन-मन-जीवन से आत्म सात करने के पूनीत उद्देश्य से ,जीवन्त होने को आतुर है।
आइये, हम महान तपोनिष्ठ, योग-प्रेम व साक्षात लगन को ईश्वर से ध्यानस्थ करवाने में सिद्ध योग ऋषि,शून्य को अनुभूत करनेवाले *स्वामी महाशून्य* (श्री महेशजी अग्रवाल)* के आचार्यत्व व दिशा वेक्ता से,
सतत *24.दिसंबर 17 से 12.जनवरी 18 तक (प्रातः 6.30 से 8 बजे )*
अपनी प्रवाह-मान, गाम्भीर्य,आत्म-उत्साहित व चैतन्य शैली में हम सब एक आनंदपूर्ण जीवन जीने की कला सीखे और शरीर स्वस्थता से  आत्म-साक्षात्कार तक की यात्रा करें।
अपनी गाम्भीर्य तल्लीन प्रसन्न-मुद्रा व भाव-विभोर मोहन-भंगिमा से आदरणीय, महाशून्यजी इंदौर ही नही अपितु देश,-विदेश में अनेकानेक, जन-मानस को मंत्र मुग्ध कर, योग -प्रेम-प्राणायाम-नृत्य व ध्यान को चैतन्य दिशा दे चुके है।
महाशून्यजी को आप-हम से तादाम्य दर्शन में पुण्योदयी भूमिका निभा रहे है,लोकप्रिय पार्षद श्री संतोषसिंह जी गोर व श्री राधेश्यामजी प्रजापति तथा श्री राजेंद्र जी  गुप्ता।
अनुग्रह....... सभी से इस आत्म-चेतना यज्ञ में ,मन की आहुति समर्पित करने को, स्व-आमंत्रण है। बाणगंगा क्षेत्र का ही नही अपितु इंदौर के योगमयी भाग्य का पुण्योदय है। इस आपके हमारे सबके *महाशून्य प्रेम योग ध्यान शिविर में।
अधिकाधिक परिजन की उपस्थिति वंदनीय है।

Tuesday, 17 October 2017

धनतेरस और तनतेरस

धनतेरस और तनतेरस

"क्या आप जानते हैं,आज धनतेरस है परंतु क्या आप जानते हैं कि आज तनतेरस भी है।
आज जहाँ एक तरफ माँ धनलक्ष्मी का पूजन हम धनकामना हेतु करते हैं।

वहीं दूजी तरफ आज स्वास्थ्य, आरोग्य,आयुर्वेद, शरीर चिकित्सा के देवता भगवन धन्वंतरि की जयंती भी है।
तन,मन की स्वस्थता हेतु क्या हम भगवान धन्वंतरि जी का पूजन उसी उत्साह ,उसी विश्वास के साथ करते हैं या करते ही नहीं हैं जिस भाँति धन कामना हेतु माँ धनलक्ष्मी का या कुबेर का।
धन अर्जन के मोंह में तन और मन के स्वास्थ्य का विसर्जन तो हम नहीं कर रहे?
*सावधान*
जबकि हम सब जानते हैं कि स्वास्थ्य ही प्रथम धन है हम सबके परम हितकारी हमारे पुरखे भी कहते थे और हमारे बड़े बुजुर्ग भी यही कहते हैं।
"प्रथमम सुखम निरोगी काया,
द्वितीयम सुखम गृहे वस माया।"
स्पष्ट है कि प्रथम सुख जब निरोगी शरीर का होना है ,सत्य ही है जब शरीर स्वस्थ नहीं होता तो धन ,यश सब व्यर्थ लगता है  फिर भी हम धन के लिए लारटपकू बन  जाते हैं।
मैं यह नहीं कहता कि आप धन की अभिलाषा न करें या धनलक्ष्मी कुबेर की पूजा न करें  अपितु मेरे कहने का संदर्भ मात्र यही है कि  हम माँ धनलक्ष्मी के साथ साथ स्वास्थ्य के देवता भगवान धन्वंतरि का पूजन भी प्राथमिकता के साथ करना न भूलें।
जैसे भिन्न भिन्न कर्मों के द्वारा हम महालक्ष्मी का पूजन करके खूब धन अर्जित करने का संकल्प लेते हैं।
उसी प्रकार योग ,संयम कर व नशा मुक्ति का संकल्प करके हम भगवान धन्वंतरि जी का पूजन उत्सव सद्भाव पूर्वक मनावें।
धन के चक्कर में तन को न ठुकराएँ।
धनतेरस व तनतेरस समभाव से मनाएँ।
बल्कि मैं तो कहूंगा कि तनतेरस और अधिक पूर्ण भावना से मनावें।
क्यों कि
धन बिन तन किस काम का,
   तन बिन  धन नहि   होय।
धन बिन  तन  रहि  जात है,,
तन बिन  रहे  न    कोय।।
मैं नहीं चाहता कि आप सब  मेरे  परम प्रिय मेरे स्वजनों को किसी प्रकार की क्षति हो या आपको किसी भी तरह का अपूर्ण लाभ मिले।
मेरी इच्छा मात्र इतनी है कि आप सम्पूर्ण हों।
आप तन से स्वस्थ हों  व धन  से  मस्त  हों।"