Tuesday, 17 October 2017

धनतेरस और तनतेरस

धनतेरस और तनतेरस

"क्या आप जानते हैं,आज धनतेरस है परंतु क्या आप जानते हैं कि आज तनतेरस भी है।
आज जहाँ एक तरफ माँ धनलक्ष्मी का पूजन हम धनकामना हेतु करते हैं।

वहीं दूजी तरफ आज स्वास्थ्य, आरोग्य,आयुर्वेद, शरीर चिकित्सा के देवता भगवन धन्वंतरि की जयंती भी है।
तन,मन की स्वस्थता हेतु क्या हम भगवान धन्वंतरि जी का पूजन उसी उत्साह ,उसी विश्वास के साथ करते हैं या करते ही नहीं हैं जिस भाँति धन कामना हेतु माँ धनलक्ष्मी का या कुबेर का।
धन अर्जन के मोंह में तन और मन के स्वास्थ्य का विसर्जन तो हम नहीं कर रहे?
*सावधान*
जबकि हम सब जानते हैं कि स्वास्थ्य ही प्रथम धन है हम सबके परम हितकारी हमारे पुरखे भी कहते थे और हमारे बड़े बुजुर्ग भी यही कहते हैं।
"प्रथमम सुखम निरोगी काया,
द्वितीयम सुखम गृहे वस माया।"
स्पष्ट है कि प्रथम सुख जब निरोगी शरीर का होना है ,सत्य ही है जब शरीर स्वस्थ नहीं होता तो धन ,यश सब व्यर्थ लगता है  फिर भी हम धन के लिए लारटपकू बन  जाते हैं।
मैं यह नहीं कहता कि आप धन की अभिलाषा न करें या धनलक्ष्मी कुबेर की पूजा न करें  अपितु मेरे कहने का संदर्भ मात्र यही है कि  हम माँ धनलक्ष्मी के साथ साथ स्वास्थ्य के देवता भगवान धन्वंतरि का पूजन भी प्राथमिकता के साथ करना न भूलें।
जैसे भिन्न भिन्न कर्मों के द्वारा हम महालक्ष्मी का पूजन करके खूब धन अर्जित करने का संकल्प लेते हैं।
उसी प्रकार योग ,संयम कर व नशा मुक्ति का संकल्प करके हम भगवान धन्वंतरि जी का पूजन उत्सव सद्भाव पूर्वक मनावें।
धन के चक्कर में तन को न ठुकराएँ।
धनतेरस व तनतेरस समभाव से मनाएँ।
बल्कि मैं तो कहूंगा कि तनतेरस और अधिक पूर्ण भावना से मनावें।
क्यों कि
धन बिन तन किस काम का,
   तन बिन  धन नहि   होय।
धन बिन  तन  रहि  जात है,,
तन बिन  रहे  न    कोय।।
मैं नहीं चाहता कि आप सब  मेरे  परम प्रिय मेरे स्वजनों को किसी प्रकार की क्षति हो या आपको किसी भी तरह का अपूर्ण लाभ मिले।
मेरी इच्छा मात्र इतनी है कि आप सम्पूर्ण हों।
आप तन से स्वस्थ हों  व धन  से  मस्त  हों।"

Friday, 15 September 2017

"विश्व शांति कैसे संभव है ?-उपाय न -३ : How Global Peace Possible ?-Remedy No-3"

"विश्व शांति  कैसे संभव है ?-उपाय न -३ : How Global Peace Possible ?-Remedy No-3"


Mahashunya talks Excellently on "विश्व शांति  कैसे संभव है ?-उपाय न -३ : How Global Peace Possible ?-Remedy No-3" at Indore Centre (MP)-India on 24.07.2017.

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https://www.youtube.com/watch?v=fpU2-LKw-_E

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"विश्व शांति कैसे संभव है ?-उपाय न -२ : How Global Peace Possible ?-Remedy No-2"

"विश्व शांति  कैसे संभव है ?-उपाय न -२  : How Global Peace Possible ?-Remedy No-2"


Mahashunya talks Excellently on "विश्व शांति  कैसे संभव है ?-उपाय न -२  : How Global Peace Possible ?-Remedy No-2" at Indore Centre (MP)-India on 24.07.2017.

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https://www.youtube.com/watch?v=fpU2-LKw-_E

"विश्व शांति कैसे संभव है ?-उपाय न -१ : How Global Peace Possible ?-Remedy No-1"

"विश्व शांति  कैसे संभव है ?-उपाय न -१ : How Global Peace Possible ?-Remedy No-1"


Mahashunya talks Excellently on "विश्व शांति  कैसे संभव है ?-उपाय न -१ : How Global Peace Possible ?-Remedy No-1" at Indore Centre (MP)-India on 24.07.2017.

Watch his full discourse on the link below
https://www.youtube.com/watch?v=fpU2-LKw-_E

क्या विश्व शांति संभव है ? : Is Global Peace Possible?

क्या विश्व शांति संभव है ? : Is Global Peace Possible? 

महाशून्य का सत्संग जरूर सुने।

Mahashunya talks Excellently on "Is Global Peace Possible? : क्या विश्व शांति संभव है? at Indore Centre(MP)-India on 24.07.2017.

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https://www.youtube.com/watch?v=fpU2-LKw-_E
https://youtu.be/fpU2-LKw-_E

*इंदौर आकाशवाणी पर 'योग-निरोग' कार्यक्रम में "योग और अध्यात्म" विषय पर भेंटवार्ता*

महाशून्य ( महेश अग्रवाल ) के साथ इंदौर आकाशवाणी के श्री उमेश कुलकर्णी की *"योग-निरोग"* कार्यक्रम में *'योग और अध्यात्म'* विषय पर भेंटवार्ता।
जिसका प्रसारण इंदौर आकाशवाणी रेडियो पर medium wave (MW) 648 Khtz पर दिनांक 23 जुलाई'2017 ,रविवार को सुबह 7:15 से 7:30 तक किया गया।
एक मित्र द्वारा प्रसारण के समय मोबाइल से ये कार्यक्रम रिकॉर्ड किया गया जो आप यहाँ पर सुन सकते है और अन्य ग्रुप में शेयर भी कर सकते है।
धन्यवाद्।
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Wednesday, 16 August 2017

ध्यानी और कामी

"ध्यानी और कामी :

ध्यानी की स्वांस धीमी होती है क्योंकि उसको कम प्राणवायु की जरुरत होती है क्योंकि उसका ध्यान अपने भीतर होता है ।
लेकिन 
कामी की स्वांस तेज होती है क्योंकि उसको ज्यादा प्राणवायु की जरुरत होती है क्योंकि उसका ध्यान अपने से बाहर होता है।"~
#महाशून्य